दरखतें मीनारों की रुसवाईयां सुनो ;
उजड़ी झोपडी के चारो के अन्दर तो झांको ;
फरफराती ताखातियाँ आवाज दे रही तुम्हे;
किसी पुराने लाइट-हाउस को घुड़ा है तुमने?
इतिहास के मंजरो से धुल तो जरा हटाना;
मिलेगा वो सब कुछ ,रूह जिसके तालाश में है अब तक;
पलकों से दूसरो को निहारना तो छोड़ो;
अपने पे इक बार नजरें तो फिराना ;
अंदाज अपना बनाओ फिर से शायराना ;
महरूमियत पे जुस्तजू की चादर तो चढ़ाना;
रु-ब-रु होंगी हर वो हबाब ;
सहेजा था जिसको बना कभी अपना ख्वाब ;
मुददते लाख बूड़ी क्यों ना हो;
पेंचीदा कितना भी क्यों ना हो सवाल हौसले डगमगा सकते है हर इक बार ;
मुश्किले रहबर में जब भी हो दो-चार ;
इत्मिनान रखना ,समझाना मन को बस इतनी सी बात ;
बादलों में छुप कर भी चाँद ठहरता नहीं;
चिर कर आता हर इक बार करने हमें गुलजार ;
बस इतनी बात है कहनी ,याद रखियो यार;
और कुछ हो ना हो ,महसूस करोगे हल्का हर बार ,हर बार ,हर इक बार|
उजड़ी झोपडी के चारो के अन्दर तो झांको ;
फरफराती ताखातियाँ आवाज दे रही तुम्हे;
किसी पुराने लाइट-हाउस को घुड़ा है तुमने?
इतिहास के मंजरो से धुल तो जरा हटाना;
मिलेगा वो सब कुछ ,रूह जिसके तालाश में है अब तक;
पलकों से दूसरो को निहारना तो छोड़ो;
अपने पे इक बार नजरें तो फिराना ;
अंदाज अपना बनाओ फिर से शायराना ;
महरूमियत पे जुस्तजू की चादर तो चढ़ाना;
रु-ब-रु होंगी हर वो हबाब ;
सहेजा था जिसको बना कभी अपना ख्वाब ;
मुददते लाख बूड़ी क्यों ना हो;
पेंचीदा कितना भी क्यों ना हो सवाल हौसले डगमगा सकते है हर इक बार ;
मुश्किले रहबर में जब भी हो दो-चार ;
इत्मिनान रखना ,समझाना मन को बस इतनी सी बात ;
बादलों में छुप कर भी चाँद ठहरता नहीं;
चिर कर आता हर इक बार करने हमें गुलजार ;
बस इतनी बात है कहनी ,याद रखियो यार;
और कुछ हो ना हो ,महसूस करोगे हल्का हर बार ,हर बार ,हर इक बार|