Friday, June 15, 2018

IT cells की धक्कामुकी और हम.......



 तमाम महिषी जिन्होंने अपना सर्वश्व अपने आराध्या को अर्पित कर दिया ,इन दिनों फ्रस्टियाए हैं ...........
 सभी नए "भक्तों " के उदय से ,उनके चहुंओर चर्चा से अपने स्थान को खोजने में लगे हैं  , सोच में पड़े हैं की क्या इन भक्तों का भगवान इतना शक्तिशाली है की जिसने सब को पीछे छोड़ दिया है |
कुछ टीस सोशल मीडिया ,इंटरनेट और फ्रीडम ऑफ़ स्पीच के उनके वक़्त न होने पर  भी  हो सकता  है जिसने  इन नव भक्तों को इतना नाम  और बदनामी दिया है ,अंततः   टॉप ट्रेडिंग में बनाये रखा है ...
पर सबसे  बड़ा श्रेय  तो जाता है इनके भगवान को जो लोकप्रियता और नफ़रत दोनों से लगातार चर्चा के शीर्ष पर विराजमान है ,जिसने संपूर्ण भारत को दो ध्रुवों में बाँट दिया है ...एक इसके आलोचक हैं और दूसरा इसके प्रशंसक (वैसे भगवान की महिमा इतनी विशाल है की अगर आप उनकी पार्टी ,देश की नीति या फिर सरकार के  भी काम से खुश हैं या इत्तेफ़ाक़ रखते हैं तो आप भक्त की टोली में हैं या नही तो  जबर्दस्ती दूसरे पक्ष द्वारा उसमे धकेल दिए जा सकते हैं )
मनो पूरा माहौल "देव मोदी " मय हो ..pro -मोदी  या anti -मोदी.
आम आदमी को गुटनिरपेक्षता का कोई विकल्प ही नही मिल रहा ...अगर कोई कोशिश कर भी रहा तो "धकेल" अथवा "धकिया "लिया जा रहा है..
मैं नही जानता की गाँधी, नेहरू , आंबेडकर ,इंदिरा या अटल यहाँ तक की हिटलर , स्टालिन,या सद्दाम का भी इसी तरह   का जन-समर्थन या विपथन था या नहीं..पर इतना जरूर बता सकता हूँ की "भक्त" कभी नहीं हुआ |
तो क्या मोदी साहब पार्टी ,विचारधारा ,नीतियों  , देश  सब से ऊपर हो चले हैं ...पता नही ..ये तो भक्त और आलोचक ही बता पायेंगे......
 बात जो भी हो...
पर  बड़े करीने से भक्त उभड़े हैं या उभाड़े गए हैं (चाहे वो उपहास या आलोचना के लिए ही क्यों न हो )
 फलतः नेताओं ,अभिनेताओं ,यहाँ तक की कई निर्विकार संतों,लेखकों ,कवियों  को जरूर ईर्ष्या में जला रहें है ...हाँ भक्त जरूर उल्लाशीत और आत्म-मुग्धा हैं ...पर आम भारतीय इस तरह के सांचे में खुद को नहीं  चाहता है|
खैर ,क्या करें , विविध भारत में भिन्न मत  अब  असहिष्णुता ,सेक्युलर ,या भक्त के नाम हो चले हैं ...Ravi Kashyap

Tuesday, June 12, 2018

Specialist vs generalist घमासान के बीच लेटरल एन्ट्री


धूल फाँकते द्वितीय प्रशासनिक आयोग की रिपोर्ट के कुछ पन्नों को पलट कर सरकार ने अनुसंशित लेटरल एंट्री का प्रयोगात्मक परीक्षण शुरू क्या किया ,हल्ला मच गया चहुँओर .ऐसा प्रतित हुआ मानो हमारे संप्रभुता में किसी ने घुसपैठ कर दिया हो। शोर तो ऐसा है जैसे कि हमने इससे पहले लेटरल एंट्री प्राप्त लोगो को देखा ही न हो और वो ऐलियन हों।
 असल बात ये है कि आम लोग और ताकतवर ias लॉबी को लगता है कि सिविल सेवा की तैयारी और उसमें सफल व्यक्ति को सभी तरह का ब्रह्म ज्ञान हो आता है,उनसे अच्छा काम कोई कर ही नही सकता। हाँ,काफी क्षेत्र के लिए ये सच भी हो सकता है पर कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमे विशेषज्ञ होना आवश्यक है,.......पर अहम का क्या करें।
ये भी एक सत्य है कि जिनका upsc क्लियर नही होता उनमे भी विद्वता होती है साहब। देश भर एवम विदेशों   में सरकारी ,निजी और सरकार प्रायोजित रिसर्च इंस्टीट्यूट ,रेलवे, IIT's ,नवरत्न ,महारत्न कंपनी, भारतीय इंजीनियरिंग सेवा आदि में कार्यरत भारतीय  अधिकारी ias अफ़सर नही हैं पर राष्ट्र सेवा में उनका सहयोग और योगदान उल्लेखनीय है ।
क्या आईएएस अधिकारी ही मात्र संयुक्त सचिव की योग्यता रखते हैं??? विशेषज्ञ संस्थाओं में काम कर रहे लोग सरकार के उन विभागों,प्रभागों जिनमे इनकी विशेषज्ञता काम आ सकती है में नियामक पद पर हों तो क्या ये किसी ias अफसर से ज्यादा प्रभावी नही होंगे?
पर क्या करें ताक़तवर आईएएस लॉबी इसे अपना बपौती समझते आएं हैं और राजनीतिक दल  ..क्या मज़ाक है। उन्हें तो बस कोई मुद्दा चाहिए हल्ला मचाने का,उनमे इतनी ना समझ बाकी है ना विवेक और अगर है भी तो विरोध के नाम पर सब भाड़ में जाये।किसी आयोग को बनाना और फिर उसके सुझावों को भुला देना हमारी राजनीतिक फिदरत जो रही है।

खैर ,देश -विदेश से भारतीय विशेषज्ञ भारत आये जैसे मनमोहन सिंह ,मंटेक सिंह अहलवालिया, रघुराम राजन सरीखे लेटरल एंट्री और राष्ट्र निर्माण में सहयोग किया।
आईएएस लॉबी और आम जन को ये सोचना चाहिए कि विशेषज्ञता लंबे बक्त में आती है अतः आईएएस अधिकारी कुछ वक्त के लिए सेवा से लैटरल exit लें और  विशेषज्ञ संस्थाओं में काम कर अपने योग्यता बढ़ाएं ।फिर पूरा मैदान हक़ से आपका ना कि जिद और "हम अधिकारियों पर विश्वास नही"जैसे कुतर्कों से।क्योंकि विश्वास तो सब का हक़ है ना की मात्र आपका।

और हां....अति महत्वपूर्ण जैसे,रक्षा,वित्त,विदेश, गृह जैसे कई  आपके विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए इन व्यवस्था से अलग रखे गए हैं।अतः विलाप की जगह संघर्ष करें,अहम को त्याग राष्ट्र निर्माण में सभी के सहयोग को स्वीकार करें।