Tuesday, November 27, 2012

phir mulakat hogi...

तुम बिन जिंदगी इक स्याह सी रात होगी...
मरते दम तक तेरी याद ही याद होगी...
हुक लिए दिल मे फिरता रहूँगा यहाँ-वहाँ..
दिलजले की खुदा से बस इक ही अता होगी...
मुशाफिरहै हम भी मुशाफिर हो तुम भी..
इक ना इक दिन मुलाकात होगी

Monday, November 12, 2012

कैसी ये टिश-टिशी!!!!!!!!!!!!!!!!

आँखे हैं धुआ-धुआ;
दिल भी क्यों भरा-भरा;
आज क्यों,ज़ज्बात यूँ हावीं हैं,
क्यों बेचैनी अजीब सी;
कुछ चुभा तो है, जिसकी है ये टिश-टिशी|
     कुछ दिन पहले  की तो बात है;
     हम कितने खुशमिजाज थे;
     क्या हुआ,कैसे बँधे यूँ मोह-फांश मे;
     के जाते ही उनके बेकरार होने लगे;
आना भी उनका, तो ना अजीब था;
साथ भले हाशीन हो;
पर इसका तो इल्म था ही;
फिर क्यों ,जाने से उनके हम गमशीन हो रहे;
      ऐसा भी ना था की हम थे किसी गिरफ़्त मे,
      ये अलग है,की इक सुकून था उस हबीब मे,
      पर समझदार हम,उनपे फ़ना भी तो ना थे,
      फिर क्यों,ऐहसास उनका इतने करीब मे;
 

Sunday, November 11, 2012

तनहाईयाँ

तनहाईयाँ ऐसे क्यो अपनी हुई;
खुद को खुदी मे डूबा कर;
बेखुदी से क्यो इश्कजदा हूँ यूँ;
बे-मद मयखाने मे ही;
खाली प्यालों को टकराते भी;
मदहोशी क्यो ऐसे छा रही;
खामोश हम,खामोश है समा भी;
फिर क्यों,खलल सी चिढ़ है मुझ में|