Saturday, July 11, 2015

समय के गर्भ से........from the womb of tiime...

समय के गर्भ से........from the womb of tiime...
मैं कोई पेड़ नहीं,कोई खेत नही ,ना खलिहान हुँ ,ना बगीचा..मैं तो हूँ खेतों में समृद्धि के पानी रोकने वाला ..जिस पर बैठ किसानों ने घाम सुखाये ..जिसने खुद पर जख्म खा कर माली के उपवन बचाये ...जिन पर चल कितनो ने मंजिल को पाये...
पर जब भी मैं महत्वाकांक्षा के आरे आया उसी किसान ने मुझे काट कर खेतों को बढ़ाया ....जों उड़ानों के बीच आया ..मेरे जख्मों को चीड़ कर रास्ता बनाया....जब- जब दौड़ाती कदमो से संतुलन ना बिठा पाया.....मुझे रौंद हर किसी ने पंख है फैलाया ...
क्योकि मैं खेत नही ,खलिहान नही ,बाग नही , बगीचा नही... जिनका कोई मतलब हो ..जिनसे मतलब निकले ...मैं तो ...मैं तो...मेड हूँ ...मेड...जो कंही कभी किसी खेत का बचा -खुचा झूठन है ...कभी किसी भागते "राही" की पगडण्डी ...और भला इन्हे कोई क्यों याद रखे ...क्योकि मैं " मेड" हूँ ?????...जिसपर कुछ नही उगता...जो सबका है और जिसका कोई नही... Ravi kashyap.