देख रहा मै चांदनी चौक की भीड़ में ;
खेल रहा वो मानव-सागर के मध्य में ;
खुला देह और अस्थि रंजित है काया ;
तेज दुपहरी भी सर चढ़ कर है आया |
दिखा रहा है अपने से बढ़ कर करतब ;
ना थकावट ,ना पशीना कहा है इन से मतलब |
कभी दौरता,कभी कूदता ;
रस्सी की पगडण्डी पर चलता;
तरह-तरह से है रिझाता;
उम्र से बढ़ सब कर जाता;
कौतुहल बस देख रहा मै एक -टक;
एकाग्रता से टिका नन्हा नट|
एक से बढ़ कर एक खेल दिखता ;
फिर थक कर बैठ है जाता ;
बिखरती भीड़ देखता रह जाता;
अनायास ही विनय हाथ फैलता |
स्नेहरहित खड़ा अकेला वह निष्कपट ;
नीर-नैनों से शुन्य घूरता नन्हा नट|
शुष्क त्वचा और रक्त-रंजित हैं ऐडिया;
दुर्बल देह बहा रही श्रम-रस की नदिया ;
गुलाबी गालो में बची बस सुखी पंखुरिय ;
किलकारियों को बंधे ना जाने कौन सी बेड़िया|
बचपन की सोखी से दूर संघर्ष करता अनवरत ;
दिव्या शक्ति से चमकता नन्हा नट|
खिलौनों से बंचित हाथ ;
ना साया ,ना ही कोई साथ;
उदर-पूर्ति को खुद ही आत्म-साथ ;
कूड़े में ही ढूंढ़ रहा उज्वल उल्लास |
मासूमियत पर लिए उदाशी की कड़वाहट;
बिना शिकायत मुस्कुराता नन्हा नट |
कहा संवेदनहीन संसार को है एहसास ;
क्या चढ़ेगा इस नूतन अभिलाष पर पुष्प पलाश ;
कब पड़ेगा पंकज कलियों पर स्नेह प्रकाश ;
कब होगा मानव को मानव दुखः का आभास |
ना बचपना, ना ही कोई बाल-हट ;
असमय ही बड़ा हो गया नन्हा नट|
अचानक तालियों की आई गड़गड़ाहट;
शायद विराम की है आहट,
पर,अभी और खेलेगा नन्हा नट|
नन्हा पूछ रहा जग से प्रश्न प्रबल ;
कब तक धुल-धूसरित रहेंगे राज-कवल;
क्या इसका जीवन भी बन जायेगा मरुअस्थल ;
बचपन मांग रहा सभ्य भीड़ से इसका हल |
भीड़ की आर में देख रहा माजरा विकट;
देव-शक्तियुक्त ,अविराम खेलता नन्हा नट |
खेल रहा वो मानव-सागर के मध्य में ;
खुला देह और अस्थि रंजित है काया ;
तेज दुपहरी भी सर चढ़ कर है आया |
दिखा रहा है अपने से बढ़ कर करतब ;
ना थकावट ,ना पशीना कहा है इन से मतलब |
कभी दौरता,कभी कूदता ;
रस्सी की पगडण्डी पर चलता;
तरह-तरह से है रिझाता;
उम्र से बढ़ सब कर जाता;
कौतुहल बस देख रहा मै एक -टक;
एकाग्रता से टिका नन्हा नट|
एक से बढ़ कर एक खेल दिखता ;
फिर थक कर बैठ है जाता ;
बिखरती भीड़ देखता रह जाता;
अनायास ही विनय हाथ फैलता |
स्नेहरहित खड़ा अकेला वह निष्कपट ;
नीर-नैनों से शुन्य घूरता नन्हा नट|
शुष्क त्वचा और रक्त-रंजित हैं ऐडिया;
दुर्बल देह बहा रही श्रम-रस की नदिया ;
गुलाबी गालो में बची बस सुखी पंखुरिय ;
किलकारियों को बंधे ना जाने कौन सी बेड़िया|
बचपन की सोखी से दूर संघर्ष करता अनवरत ;
दिव्या शक्ति से चमकता नन्हा नट|
खिलौनों से बंचित हाथ ;
ना साया ,ना ही कोई साथ;
उदर-पूर्ति को खुद ही आत्म-साथ ;
कूड़े में ही ढूंढ़ रहा उज्वल उल्लास |
मासूमियत पर लिए उदाशी की कड़वाहट;
बिना शिकायत मुस्कुराता नन्हा नट |
कहा संवेदनहीन संसार को है एहसास ;
क्या चढ़ेगा इस नूतन अभिलाष पर पुष्प पलाश ;
कब पड़ेगा पंकज कलियों पर स्नेह प्रकाश ;
कब होगा मानव को मानव दुखः का आभास |
ना बचपना, ना ही कोई बाल-हट ;
असमय ही बड़ा हो गया नन्हा नट|
अचानक तालियों की आई गड़गड़ाहट;
शायद विराम की है आहट,
पर,अभी और खेलेगा नन्हा नट|
नन्हा पूछ रहा जग से प्रश्न प्रबल ;
कब तक धुल-धूसरित रहेंगे राज-कवल;
क्या इसका जीवन भी बन जायेगा मरुअस्थल ;
बचपन मांग रहा सभ्य भीड़ से इसका हल |
भीड़ की आर में देख रहा माजरा विकट;
देव-शक्तियुक्त ,अविराम खेलता नन्हा नट |
its good.acute meaning, but i expected more from you as i know, you can add some more hidden meaning here.
ReplyDeletenow its too gud....wn u trnslated in hindi....:)
ReplyDeleteKeep walking......
ReplyDelete.......to change the perception.
It made me clap for you...
ReplyDeletesuch a nice expression
Bravo!