कैसे बताऊँ अपने दिल की गुबाँ,
किसे सुनाऊँ दर्द-ए-इश्क बयाँ ;
न कोई रहबर ,न कोई रही ;
न लब्ज है और न ही जज्बातों की रौ;
आँशु हैं के रुकते नहीं;
होंठ है के मुस्कुराना भूल बैठे है; बाँहों में वो है तो सही ;
पर दिल से नहीं;
बेवफाई ना सही ,
पर वफ़ा भी दिखता नहीं;
क्या करे ,ना करे कुछ सूझे नहीं;
रह गई शायद कोई क़सर;
संग ना छुट जाये ,लगता है डर;
ना हँस सके ,ना रो पा रहे;
ये किस मर्ज में फसे जा रहे ;
दर्द -ए -दिल पैहम ,पे लगाऐ कौन-सा मरहम ;
के वो भी खुश रहे और जी सके हम|
किसे सुनाऊँ दर्द-ए-इश्क बयाँ ;
न कोई रहबर ,न कोई रही ;
न लब्ज है और न ही जज्बातों की रौ;
आँशु हैं के रुकते नहीं;
होंठ है के मुस्कुराना भूल बैठे है; बाँहों में वो है तो सही ;
पर दिल से नहीं;
बेवफाई ना सही ,
पर वफ़ा भी दिखता नहीं;
क्या करे ,ना करे कुछ सूझे नहीं;
रह गई शायद कोई क़सर;
संग ना छुट जाये ,लगता है डर;
ना हँस सके ,ना रो पा रहे;
ये किस मर्ज में फसे जा रहे ;
दर्द -ए -दिल पैहम ,पे लगाऐ कौन-सा मरहम ;
के वो भी खुश रहे और जी सके हम|
awwwwssssmmmmmmm..... :/ :)
ReplyDelete