Monday, November 12, 2012

कैसी ये टिश-टिशी!!!!!!!!!!!!!!!!

आँखे हैं धुआ-धुआ;
दिल भी क्यों भरा-भरा;
आज क्यों,ज़ज्बात यूँ हावीं हैं,
क्यों बेचैनी अजीब सी;
कुछ चुभा तो है, जिसकी है ये टिश-टिशी|
     कुछ दिन पहले  की तो बात है;
     हम कितने खुशमिजाज थे;
     क्या हुआ,कैसे बँधे यूँ मोह-फांश मे;
     के जाते ही उनके बेकरार होने लगे;
आना भी उनका, तो ना अजीब था;
साथ भले हाशीन हो;
पर इसका तो इल्म था ही;
फिर क्यों ,जाने से उनके हम गमशीन हो रहे;
      ऐसा भी ना था की हम थे किसी गिरफ़्त मे,
      ये अलग है,की इक सुकून था उस हबीब मे,
      पर समझदार हम,उनपे फ़ना भी तो ना थे,
      फिर क्यों,ऐहसास उनका इतने करीब मे;
 

1 comment:

  1. EXCELLEN DEAR..

    "ek kavita meri bhi...
    mera bhi ho ek prayaas
    nutan koi geet rachu mai bhi
    kaagaz me ho simita aakash...!"

    SaMaR_GhOsH (VISHAL)

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