Sunday, May 04, 2014

ab to jago...

ज़मीं लहू- नद से भाड़ा है,
चीत्कारों से दिशा-दस कोश शमा उजड़ा है,
अब तो जागो ,ऐ गद्दी के गिद्धों ,
देखों,चहुओर अपनों का शवकर्पट बिखड़ा है,
 चलो,शुरू हो जाओ,बोली लगाओ,
 देखो,तुम्हारे लिए भोजन बिखड़ा है,
 चुन-चुन कर गिनती करते जाओ,
 क्रदन स्वर को भाषनो से दबाओ,
  और राहत का माल जाम कर खाओ
                           अब तो जागो ऐ नेता मेरे,
                        देखो हम पर क़हर ओर तुम पे मौला का क़रम बर्षा है...
                    

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