भोरे ऊठिते मिथिला मोन पड़ल '
तिला-संक्रतिक तिलबा मोन पड़ल ,
थर-थर करैत स्नानक देह ,
तैय पर घुड़ क आभा मोन पड़ल ,
चुड्लाई -मुड्लाई आ तिलकुटक संग
खिचड़ी क चार यार आ गुड्डी मोन पड़ल ,
कतय आबि गेलौं ई घुडदौरी मे,
तिथ देख सब पाबैन मोन पड़ल ,
आही बहाने फेर सँ एक बेर बचपन मोन पड़ल।
तिला-संक्रतिक तिलबा मोन पड़ल ,
थर-थर करैत स्नानक देह ,
तैय पर घुड़ क आभा मोन पड़ल ,
चुड्लाई -मुड्लाई आ तिलकुटक संग
खिचड़ी क चार यार आ गुड्डी मोन पड़ल ,
कतय आबि गेलौं ई घुडदौरी मे,
तिथ देख सब पाबैन मोन पड़ल ,
आही बहाने फेर सँ एक बेर बचपन मोन पड़ल।
No comments:
Post a Comment