ITS ALL ABOUT INDIA...
FROM SENTIMENT TO SITUATION...
Sunday, September 02, 2012
kya ham itne begane the
शहीदों की मज़ारो पर गया मैं तो,
लगा जैसे किसी दरख़्त से कोई रूह बोल रही,
हम थे तेरे मन मे -तेरे तन मे,
तन तो तेरा अब भी,मन भी है ही,
पर ना तन के आंशू मे,
ना मन की हाँसियो मे,
मेरा अफ़साना है,
हाय!क्यो भूल बैठे यूही,
क्या हम इतने बेगाने थे|
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